विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना में उमड़ा जनसैलाब, ‘हर-हर महादेव’ की गूंज से झूम उठे भक्त।

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पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड अंतर्गत कैथोलिया गांव में आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला, जब विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। इस भव्य धार्मिक आयोजन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उपस्थित रहे। उनके साथ बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा सहित कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।शिवलिंग स्थापना के अवसर पर कुणाल किशोर के पुत्र सायन किशोर एवं शांभवी चौधरी ने यजमान की भूमिका निभाते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखनाद के बीच सैकड़ों पंडितों द्वारा सामूहिक रूप से पूजा संपन्न कराई गई। इस दौरान पूर्वी चंपारण ही नहीं, बल्कि बिहार के विभिन्न मठों और मंदिरों से आए पुजारी भी इस ऐतिहासिक अनुष्ठान के साक्षी बने।कार्यक्रम में बिहार समेत कई अन्य राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जैसे ही शिवलिंग की स्थापना पूर्ण हुई, पूरे केसरिया क्षेत्र में हर हर महादेव और बोल बम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिला प्रशासन को विराट रामायण मंदिर परियोजना को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विराट रामायण मंदिर प्रांगण की चारदीवारी का निर्माण शीघ्र जिला प्रशासन द्वारा कराया जाए, ताकि मंदिर परिसर की सुरक्षा और सुव्यवस्था सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने केसरिया और कल्याणपुर के बीच मंदिर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक नए थाना भवन के निर्माण का भी निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी बिहार की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।

शिवलिंग स्थापना समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आया, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

कुल मिलाकर, केसरिया के कठोलिया गांव में हुआ यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के साथ ही केसरिया अब वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।