सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में उमड़ने लगी भक्तों की भीड़, लगे "हर-हर महादेव" के जयकारे।

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आज सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस दौरान भक्तों ने शिवजी के जयकारे लगाए.आज से सावन माह शुरू हो चुका है. सावन के पहले दिन शिवमंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। महाराजगंज में भी आज सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में शिव भक्त शिवजी का जलाभिषेक करते नजर आए. महिलाएं और पुरुष भगवान शिव का अभिषेक करने मंदिर पहुंचे. इस दौरान भक्तों ने "हर हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारे लगाए।

सोमवार को उमड़ती है भक्तों की भीड़: 

महाराजगंज के रामेश्वर धाम मंदिर के पुजारी ने बताया, "आज से सावन का महीना शुरू हो गया है. सावन के सोमवार को भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं. सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं. आज सावन का पहला दिन है. मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया है. हालांकि सोमवार को भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है. हर सोमवार को भक्त भगवान शिव को जल अर्पण करने के लिए मंदिरों में आते हैं."

शिवभक्तों के लिए खास होता है सावन: 

सावन के पहले दिन से ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है. शिव भक्त पैदल जाकर गंगा से जल भरकर लाते हैं. इसके बाद शिवालय जाकर भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ये पूरा माह भगवान शिव को समर्पित होता है. इस पूरे माह भगवान शिव के भक्त शिव की आराधना करते हैं।

सावन महीने का महत्व : 

पंडित ने बताया कि सावन महीना हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी महत्व रखता है. ये महीना महादेव को समर्पित होता है जिसमें विशेष तौर पर महाशिवरात्रि का पर्व आता है. इस महीने में महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है इस महीने के दौरान आने वाले सोमवार और महाशिवरात्रि को महादेव के लिए व्रत रखा जाता है और जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है जिससे महादेव की कृपा परिवार पर बनी रहती है और घर में सुख समृद्धि आती है. इस महीने के दौरान महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक मान्यताएं क्या कहती है ? : 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से निकलने वाले हलाहल विष को महादेव ने सृष्टि को बचाने के लिए श्रावण महीने में ही ग्रहण किया था जिसके चलते उनका कंठ नीला हो गया था और तब से महादेव को नीलकंठ भी कहा जाता है. तब देवताओं ने विष के असर को कम करने के लिए शिवजी का गंगाजल से जलाभिषेक भी किया था।साथ ही पौराणिक मान्यताएं कहती हैं कि मां पार्वती ने भगवान महादेव को पाने के लिए इस महीने में कठिन तपस्या की और व्रत रखा था जिसके चलते व्रत रखने का प्रचलन है. महिलाएं इस महीने के सोमवार और महाशिवरात्रि को व्रत रखती है जिससे उनका दांपत्य जीवन खुशहाल बना रहे. वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए इस महीने में व्रत भी रखती है और महादेव की पूजा अर्चना करती हैं।