नव दिवसीय राम नाम महायज्ञ का 85 वा वार्षिक समारोह संपन्न।

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जलालपुर प्रखंड के बसडीला ब्रह्म स्थान पर चल रहे नव दिवसीय रामनाम महायज्ञ संपन्न हो गया l नवरात्रि तक चलने वाले इस यज्ञ की शुरुआत हर वर्ष की भाँति इस साल भी बसंत पंचमी को हुई l दशवें दिन माघ पूर्णिमा को हज़ारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों की राम नाम की जयकारे से 216 घंटे बाद पूर्णाहुति हुई l यहां सिर्फ़ हरिकीर्तन ही नहीं होती लगातार हवन भी होता है। इसके साथ दिन में और रात में दो बार प्रवचन भी चलता है l यहां के नव दिवसीय यज्ञ की शुरुआत अंग्रेजो के शासन काल में भारत छोरों आंदोलन के पहले ही हुई जो आज तक जारी है l

यहां की सामाजिक एकता और सहयोग आम लोगों के लिए प्रेरणा दायी है l यहां के ग्रामीणों द्वारा खुद से कीर्तन और हवन किया जाता है जिसमें अगल बगल के गावों के नर नारी और नवजवानों द्वारा सहयोग कर यज्ञ को सफल बनाया जाता है l सभी ग्रामीणों के सगे संबंधी और यहां के प्रवासी भी इस पावन अवसर पर हिस्सा लेने गांव पहुच जाते है। 

प्रवचन मंच से धार्मिक कथा के अलावे सामाजिक और नैतिक शिक्षा का भी होता है मंच से प्राचार

दशवें दिन के दीवाकालीन कथा में जौनपुर से पधारे कथा वाचक श्री प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने कहा कि हमारे समाज के बहु-बेटियाँ न सिर्फ़ अपने कुल की अपितु समाज की आन-बान-शान होती है l आपको सीता माता के चरित्र का अनुकरण करना है और अपने समाज और राष्ट्र का गौरव बढ़ाना है l आपका श्रृंगार आपका चरित्र है आप जयमाला के स्टेज पर चढ़ने से पहले भगवान का आराधना करके ही जयमाला करेंl उन्होंने कहा कि आपका पति यदि हिरण्यकशिपु भी होगा तो प्रभु आपको प्रहलाद जैसा सन्तान देंगे l अन्य प्रमुख कथा वाचको में सामिल रहे वाराणसी के किरण भारती,रत्नाकर मिश्र और धर्मराज शास्त्री,मध्यप्रदेश के पवनजी महाराज, पटना के मधुकर जी महाराज पूर्व IPS, सारण के सुश्री प्रिया प्रभाकर, सुश्री साधना रामायणी,उपेंद्र दास, अयोध्या के हरिनारायण चार्य आदि l