उर्दू के विकास के लिए सरकार के साथ जनभागीदारी भी ज़रूरी: डीएम।

3 days ago 109
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- जहीन इतने हों समाज में जाहिलों की गुंजाईश न हो: एसपी।

छपरा उर्दू प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की समृद्ध भाषा है। हिंदी और अंग्रेज़ी की तरह उर्दू की नियमित शिक्षा आवश्यक है, तभी भाषा का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा। ये बातें सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के उर्दू निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित फ़रोग़-ए-उर्दू जिला स्तरीय सेमिनार सह कार्यशाला एवं मुशायरा को संबोधित करते हुए कहीं। जिलाधिकारी ने कहा कि उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार हर वर्ष इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है। लोगों की रुचि को देखते हुए उन्होंने उर्दू कोषांग से और अधिक आयोजन करने का आग्रह किया तथा आम लोगों से दैनिक जीवन में उर्दू को अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने साहित्यिक अंदाज में अपनी बात रखते हुए कहा कि जहीन इतने हों समाज में जाहिलों की गुंजाईश न हो। कहा कि भाषा और साहित्य समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। केवल सज़ा और जुर्माने से समाज में फैली बुराइयों को समाप्त नहीं किया जा सकता। साहित्यकार अपनी लेखनी और संस्कृतिक विरासत से सामाजिक कुरीतियों की जड़ों को कमजोर कर एक बेहतर समाज की नींव रखते हैं। उन्होंने युवाओं से समाज सुधार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को एक साथ लाने का अवसर हैं। 

पूर्व में कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। उर्दू भाषा कोषांग की प्रभारी पदाधिकारी एसडीसी जेबा अर्शी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उर्दू गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान है और इसकी उन्नति के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने अतिथियों और प्रतिभागियों को अंगवस्त्र, अपने कार्यकाल में उर्दू के विकास के लिए हरसंभव प्रयास का आश्वासन दिया। 

- मुशायरे में झूमे लोग।

इस अवसर पर मुशायरा का भी आयोजन किया गया. जिसमें प्रो मजहर किबरिया, डाॅ मुअज्जम अज्म, प्रो शकील अनवर, डाॅ अब्दुस समद भयंकर, डाॅ ऐनुल बरोलवी, प्रो शमीम परवेज, बैतुल्लाह बैत, सिवान के तारिक अहमद, गोपालगंज के रजी अहमद फैजी और नेसार अहमद मिस्बाही आदि ने कलाम पेश कर लोगों का भरपूर मनोरंजन किया. सेमिनार सेशन में डेलीगेट के रूप में संबोधित करते हुए डॉ लालबाबू यादव उर्दू जबान के उद्भव पर विस्तार से प्रकाश डाला. अन्य डेलीगेट में जेपीयू उर्दू विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अरशद मसूद हाशमी, ज़िला स्कूल के उर्दू शिक्षक डाॅ वालीउल्लाह कादरी ने विचार व्यक्त किया. राजेन्द्र कालेज उर्दू विभाग के डाॅ अलाउद्दीन खान, जगदम कालेज के प्रो मो हसीबुर रहमान, मदरसा वारिसुल ओलूम प्राचार्य मो इस्लामुद्दीन ने आलेख पाठ किया जबकि जुनियर आलेख पाठक में रिसर्च स्कॉलर तूबा परवीन, शायका परवीन, मो रिजवान, लतीफुर रहमान और अरमान अली शामिल थे।

- जिला उर्दूनामा का हुआ विमोचन।

इस अवसर पर जिलाधिकारी, एसएसपी व अन्य अतिथियों ने कोषांग द्वार प्रकाशित वार्षिक पत्रिका "जिला उर्दूनामा सारण" का विमोचन किया। कार्यक्रम में उर्दू से प्रेम करने वालों की भारी भीड़ उमड़ी। विशेष रूप से एनडीसी रवि प्रकाश, ओएसडी मिंटू चौधरी, एसडीसी कुमारी शिल्पी, समाजसेवी जिलानी मोबीन, अरशद परवेज मुन्नी, गुड्डू खान, अमजद अली, नियाजउद्दीन, अल्पसंख्यक छात्रावास अधीक्षक मो शरिफ खां, जमीरुद्दी अंसारी, कोषांग के वरीय सहायक मो हारून रशीद, के एम रेश्मा तबस्सुम, शिशुपाल कुमार, मो सैफुर रहमान, मो मुमताज अली अंसारी, धीरज कुमार, अफसाना परवीन, आयुष सुमन शाहनवाज खान, मो फिरोज आलम सहित जिले भर के उर्दू शिक्षक व उर्दू प्रेमी मौजूद थे।