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कोईलवर। भोजपुर।भीषण शीतलहर के बीच दलित गरीबों की बस्तियों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को कोईलवर प्रखंड मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। आंदोलनकारियों ने अंचलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपते हुए दलित गरीबों के घरों को उजाड़ने पर तत्काल रोक लगाने, उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने तथा मनरेगा की पुनर्बहाली की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर वर्षों से बसे दलित गरीबों की बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है, जो अमानवीय और गैरकानूनी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य की बड़ी आबादी दशकों से जिस जमीन पर बसी हुई है, उन्हें पीपीएच एक्ट 1948 के तहत पर्चा/पट्टा मिलना चाहिए था, लेकिन जमींदार समर्थित तंत्र के कारण कानून का पालन नहीं हो सका। बिना पक्ष सुने एकतरफा कार्रवाई कर गरीबों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर किया जा रहा है। धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण गरीबों के रोजगार गारंटी कानून मनरेगा को कमजोर किया गया है। मजदूरी में वृद्धि और समय पर भुगतान की समस्याओं को हल करने के बजाय कानून को ही खत्म करने की साजिश रची जा रही है। साथ ही, मजदूरों के ऐतिहासिक अधिकारों को समाप्त कर चार लेबर कोड लागू किए जाने का भी कड़ा विरोध किया गया। आंदोलनकारियों ने मांग की कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी भी परिवार को उजाड़ा न जाए, सभी बस्तियों का सर्वे कर पर्चा दिया जाए, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये की जाए और भूमिहीनों को प्राथमिकता मिले। इसके अलावा आदिवासियों और वनवासियों के जल, जंगल और जमीन पर अधिकार की गारंटी देने तथा वन क्षेत्रों में चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग उठाई गई। धरना का संचालन खेतग्रामस के प्रखंड कमेटी सदस्य मुखदेव राम बोस ने किया। धरना में भाकपा माले प्रखंड सचिव विष्णु ठाकुर, जिला कमेटी सदस्य विशाल कुमार, खेतग्रामस प्रखंड अध्यक्ष चंदेश्वर राम, संजय पासवान, दुधनाथ पासवान, भीम प्रसाद, सुरेश सिंह, कमेंदर बिन, धनवंती देवी, मीना देवी, आभा देवी सहित सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।









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